पारापारी आज हमारी बारी, कल तुम्हारी बारी, देखो भाई यहाँ, सही पारापारी । वक़्त का ये भँवर, बड़ा बेखबर है, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥ आज हमारी बारी, कल तुम्
पारापारी आज हमारी बारी, कल तुम्हारी बारी, देखो भाई यहाँ, सही पारापारी । वक़्त का ये भँवर, बड़ा बेखबर है, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥ आज हमारी बारी, कल तुम्हारी बारी, देखो भाई यहाँ, ठीक पारापारी । धूप-छाँव डगर, कट रहा सफ़र है, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥ राज हो या फ़कीरी, यहाँ सब वही, सिर्फ़ किरदारों की अदला-बदली रही । कल वो होगा कहाँ, जो यहाँ आज है, बहती लहरों में बस एक खलबली है ॥ मिट रहा है निशाँ, है धुआँ-सा समाँ, सपनों की परछाईं, खो गया जहाँ । क्षणिक है ये जीवन, क्षणिक है ये राह, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥ जो खिले फूल वो कल तो मुरझायेंगे, नई कलियों को गुलशन सँवरना यहाँ । खेल है ये पुराना मगर नया है, जी के हँसना तो हँसते ही मरना है ॥ थक गई है नज़र, खो गया रहगुज़र, धुंधली सी राहें, मौन है सफ़र । साँसों की डोरी, थम गई कहीं, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥ आज हमारी बारी, कल तुम्हारी बारी, देखो भाई यहाँ, सदा पारापारी । वक़्त का ये भँवर, बड़ा बेखबर है, कोई न समझा है, कोई न जाना है ॥